गिरना उठना रोज न हो।
कीर्तिश जी, पिछले सभी कार्टून व्यंग्य की दमदार अभिव्यक्ति हैं.... इस बार का भी लाजवाब... सरकार जब डबल सर वाले (सरदार) को चलाने को मिली हो तो जरूर चलेगी ... चाहे घसीटनी ही क्यों न पड़े.
इस बार का भी लाजवाब|
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गिरना उठना रोज न हो।
कीर्तिश जी, पिछले सभी कार्टून व्यंग्य की दमदार अभिव्यक्ति हैं.... इस बार का भी लाजवाब... सरकार जब डबल सर वाले (सरदार) को चलाने को मिली हो तो जरूर चलेगी ... चाहे घसीटनी ही क्यों न पड़े.
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