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Tuesday, February 26, 2019
Monday, January 14, 2019
Humor: सच्चे भारतीय हैं तो...
मोदीजी पर फिल्म बन रही है. बनाने वालों को प्रमोशन पर
खर्चा करने करने की जरूरत नहीं पड़ेगी अगर फिल्म बनाने वाले पोस्टर लिख दें 'सच्चे हिन्दू,
और
सच्चे भारतीय हैं तो ये फिल्म जरूर देखें'. फिल्म का तो पता यहीं
लेकिन पोस्टर निराश करता है. पोस्टर में मोदीजी अकेले खड़े दिखाई दे रहे हैं.
पोस्टर में न हवाई जहाज, न एटीएम, न गाय, ना पकौड़े का ठेला कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा. फिल्म में
आडवाणी के रोल को लेकर लोगों में उत्सुकता है लेकिन आडवाणी जी का कहना है कम से कम
फिल्म में तो मेरा रोल मुझे ही दे दो. विजय माल्या और नीरव मोदी ये जानना चाह रहे
हैं कि फिल्म में हमारा रोल है या हम पर एक अलग से फिल्म बनेगी? फिल्म कैसी भी
बने मोदीजी के समर्थक हिट करवाकर मानेंगे। ऑस्कर भले न मिले वे वाहट्सएप्प पर
यूनेस्को से बेस्ट फिल्म का पुरस्कार ले आएंगे।
Wednesday, January 2, 2019
Monday, December 24, 2018
मान न मान, दलित हनुमान, मुसलमान हनुमान!
Horn Ok Please
चार साल और ये कमाल
चार साल हो गए...विदेश से काला धन आए और सारे काले धन वालों को फटी बनियान और पट्टे वाली चड्डी में घूमते हुए. चार साल हो गए...पाकिस्तान की अक्ल ठिकाने आए. अब गोलीबारी और घुसपैठ तो दूर, वो रावलपिंडी में सुतली बम फोड़ने से पहले भी भारत से पूछता है.चार साल हो गए...राहुलजी पक्के हिन्दू हो गए और कांग्रेस उनका उतारा जनेऊ लेकर घूम रही है.
चार साल हो गए...गंगा साफ हुए और मिनरल वाटर वालों को सीधे गंगा से बोतलें भर-भरकर बेचते हुए.
चार साल हो गए...केजरीवाल को दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरे ठोकते हुए. इतने लगा दिए कि दीवारों पर ख़ुद केजरीवाल के पोस्टर टांगने की जगह ना बची.
चार साल हो गए...लोकपाल आए, अब कोई रिश्वत नहीं ले रहा. उल्टे सत्तर साल में जो रिश्वत दी थी, उसका रिफंड आने लगा है. चार साल हो गए...सिनेमा और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को संस्कारी हुए, हनी सिंह अब रोज़ चार बोतल दूध पीता है. (डिस्क्लेमर: ये सारी बातें काल्पनिक हैं और लिखने वाले को 26 मई को आए सपने में दिखी थी. इसका वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं है.)
दर्द-ए-सिलेंडर
गैस का सिलेंडर हज़ार रूपए के करीब पहुंच गया है. 'उज्ज्वला योजना' से कनेक्शन पाने वाली कमला का कहना है कि सिलेंडर 'रीफिला योजना' लाएं, मोदी जी. मोदी जी का हर भाषण सुनने वाले चम्पालाल दो दिन से घर के पीछे के नाले में खाली सिलेंडर औंधा रख आए हैं, लेकिन वह भरने का नाम नहीं ले रहा है. व्हाट्सऐप पर मैसेज आया है कि 'टीवी पर नेताओं के भाषण के समय उसके पास सब्जी रख देने से वो पक जाती है. जनहित में इसे फॉर्वर्ड करें.' मैसेज के साथ चेतावनी भी है कि टीवी पर संबित पात्रा और राजीव त्यागी जैसे प्रवक्ता बहस कर रहे हों तब सब्जी तुरंत टीवी के पास से हटा लें वर्ना जल जाएगी. एक फार्वर्डेड मैसेज आया कि सरकार ग्राहकों को कुछ राहत देने के लिए बदबूदार एलपीजी गैस में चन्दन और केसर जैसी खुशबू देने की सोच रही है. यह प्राकृतिक खुशबू स्वदेशी होगी और बाबा जी की कंपनी बनाएगी. एक और व्हाट्सऐप मैसेज देखें--'भले सिलेंडर 2000 का हो जाए, वोट मोदी जी को ही दूंगा' ऐसा कहने वाले एक शख्स के सर पर किचन से उड़ता हुआ बेलन आकर लगा है, अब पट्टी बंधी है. फ़ेक न्यूज़ का ज़माना, क्या पता सच है कि झूठ. वैसे महँगी गैस पर आजकल 15 रुपए पाव बिक रहे टिंडे पकाकर खाना भी आपको महँगी डिश खाने का सुख देगा.
Horn OK Please
Sunday, May 13, 2018
Friday, March 9, 2018
Friday, February 2, 2018
हमारे लिए बजट में क्या है. हंसी-मजाक
मिडिल क्लास को बजट में क्या मिला?— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 1, 2018
...वही जो बीजेपी को राजस्थान उपचुनाव में मिला. 😛 #RajasthanByPolls
— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 2, 2018
— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 1, 2018
हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा कर सकेंगे।— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 1, 2018
लेकिन हवाई चप्पल आधार से लिंक करवानी पड़ेगी।
वरना लोग मंदिरों से चुरा चुराकर उड़ते फिरेंगे
हिंदी-हिंदी वाला बजट अच्छा था. अंग्रेजी वाले की घोर निंदा. #Budget2018— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 1, 2018
बजट में सबका ध्यान रखा गया है.— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 1, 2018
मैं जैसे ही टीवी की तरफ देखता हूँ जेटली जी हिंदी में बोलने लगते हैं #Budget2018
दुुविधा Today's Cartoon on #Budget2018 pic.twitter.com/7nkn8dsiWE— Kirtish Bhatt (@Kirtishbhat) February 1, 2018
Thursday, July 27, 2017
Humor Time: लालू का लालटेन फ्यूज़
ह्यूमर टाइम: बिहार की राजनीती के मजेदार २४ घंटों का अपडेट कार्टूनों और वन लाइनर्स में
नितीश को लालू का जवाब :
Nitish Kumar : कफ़न में जेब नहीं होता।
Lalu Prasad : कफ़न की पोटली बना लें तो?
Lalu Prasad : कफ़न की पोटली बना लें तो?
नितीश ने लालटेन दे मारा है
हम तो बोलूंगा
#NitishKumar के इस्तीफे के बाद लालू को कुछ तो बोलना ही था, अगर नीतीश के खिलाफ ये केस के कागज़ ना मिलते तो लालू 'जॉनी जॉनी यस पापा' सुनाकर जाते।
बिहार का लेटेस्ट टॉपर
चैनल वालों का अपना अलग ही राग है
''नीतीश का इस्तीफा सबसे पहले हमारे चैनल पर" hahahaha. इनका बस चले तो "पेट सफा, हर रोग दफा" भी 'सबसे पहले हमारे चैनल पर' लिख दें।
लालू की अंतरात्मा भैसों के साथ
सबकी अंतरात्मा बोल रही है, एक लालू ही हैं जिसने अपनी अंतरात्मा भैंसों के साथ पीछे तबेले में बांध रखी है
कहाँ गए वो लोग
कौन कह रहा था 'केंद्र राज्य सरकारों के साथ सहयोग नहीं करता' ?? #Bihar 😝
लालूजी की अंतरआत्मा सेंटरफ्रेश खाती है
Thursday, July 20, 2017
Thursday, May 11, 2017
Monday, February 13, 2017
Friday, August 5, 2016
Thursday, October 1, 2015
एक्सीडेंट हो गया ……!!!
![]() |
| मोनिका गुप्ता |
55 वर्षीय जुल्फी मियां घबराए हुए, चाय की दुकान की ओर चले आ रहे थे. चेहरा सुर्ख लाल,हाथ-पांव कांपते हुए मेरे पूछने पर कि चच्चा जान, क्या हुआ उन्होंने बताया कि मियां, आज तो पूछो ही मत ... एक्सीडेंट हो गया... !!! यार-दोस्त उनकी हालत देखकर घबरा गए । छोटू को चाय आर्डर किया और उन्हें कुर्सी पर बैठाकर खैर-खबर जाननी चाही कि आखिर हुआ कैसे कि इतने में सतीश बोल पड़ा, यार सड़क पर इतने गड्डें हैं, कोर्इ हाल है क्या, वहीं उलझ गए होंगे और एक्सीडेंट हो गया होना है और नही तो क्या !!!
मनप्रीत ने अपनी राय रखी, ओये! तेनू की पता …. ऐ लोकल बसैं होन्दी हैं ना उसदे ऊपर लटक-लटक के जान्दें ने लौकी ……. मैं तां कहदां हां कि जुल्फी मियां भी किसे बस इच लटक के जा रहे होंगे तैं उदैं विचों डिग पए होणगे । तभी विक्टर ने टोका, हे मार्इप्री, मनप्रीत गुस्से से बोला, ओए नां ठीक लया कर … अंग्रेजी दा पुत्तर…….गल करदा है … मैंने बात गिड़ते देख उनकी सुलह करवार्इ और विक्टर से पूछा तो उसने बताया कि वैरी सिम्पल, द ओनली रीजन इज मोबाइल यार ! पीपल टाक टू मच ओन मोबाईल वार्इल ड्रार्इविंग, आर्इ थिंक दिस इस द ओनली रिजन आफ एक्सीडेंट तभी तार्जन मेरा मतलब टार्जन अपनी तातली आवाज में बोला, मु…….. मुझे पता है……… तोर्इ गाय तामने अचानक आ दर्इ होगी । औल तुल्फी मियां चलक पल गिल पले होंदे।
तभी खुद को हीरो समझने वाला शहिद बोला, ओ कम ओन यार, यू नो, ये सब दोस्ती का चक्कर है. मोटरसाइकिल और स्कूटर चलाते समय एक दूसरे का हाथ पकड़ लेते हैं और गाना गाते सड़क पर अपना दुपहिया भगाते हैं । आर्इ थिंक, दिस इज द रिजन, फ्रेंडस ।
तभी कमल हकलाता हुआ बोला …..त ….त……त…..तुम…..स…. सब गलत हो…….! नेताओ काइ…….इतना ….स…. स….. सारा काफिला च…. च….. चलता ……. है ……. ब …..ब ….बस……. किसी …….. ग….. ग….. गाड़ी…… ने ठोक दि…. दि…. दिया होगा ! बे…. बे…. बेचारे …..जु….. जु…. जुल्फी मियां ……..! तभी मेरा ध्यान जुल्फी मियां की तरफ गया । चाय उनके हाथ में ज्यों की त्यों रखी थी और चाय में काली मलार्इ जम चुकी थी और वो मानो किसी दूसरी ही दुनिया मे खोए हुए थे.
हम सभी ने तुक्के लगाने की बजाय चच्चा से ही बात करना बेहतर समझा और गहरी सोच में डूबे जुल्फी मियां ने बताया कि उनका ए ए ए ए एक्सीडेंट हो गया. इसी बीच में छोटू गर्म चाय का नया गिलास देकर चला गया था । मैंने फिर पूछा कि कहीं बंद फाटक के नीचे से तो नहीं निकल रहे थे कि ट्रेन आ गर्इ हो । उन्होंने फिर से न की मुद्रा में सिर झटक दिया । हम सब हैरान परेशान हो चुके थे ना कोई चोट का निशान न कुछ पर चेहरे पर पूरे 12 बजे हुए थे आखिर माजरा है तो क्या !! जुल्फी मियां हमारी किसी भी बात से सहमत ही नहीं थे पर रट एक ही लगा रखी थी कि एक्सीडेंट हो गया। हम आपस में बातें करने लगे कि आजकल बस या जीप के ड्रार्इवर के पास लाइसेंस तो होता नहीं है बस ड्राइवर बन जाते हैं और तो और छोटे-छोटे बच्चे भी धड़ल्ले से स्कूटी, कार, मोटरसाइकिल चलाते हैं । वही पुलिस भी ले देकर बात रफा दफा कर देती है.
तभी, जुल्फी मियां ने चाय का गिलास मेज पर रखा और चिल्लाते हुए बोले नहीं, अम्मा यार, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । वो तो ….. वो तो….. राह से गुजरते वक्त चश्मेबददूर बानो हमें मिल गर्इ थी । हमारी उनसे और उनकी हमसे ….नजरें इनायत हुर्इ… और फिर चार हुई … बस समझो कि ऐसा एक्सीडेंट हुआ कि….. बस…..!! ये कहते हुए खुदा हाफिज करते हुए, मुस्कुराते हुए बाहर निकल लिए और हम सब अपना सिर पकड़ कर बैठ गए ।
Sunday, September 27, 2015
लोकतंत्र के लिए हादसे ज़रूरी हैं !
![]() |
| संतोष त्रिवेदी |
कभी हादसों की वजह से मंत्री-पद खतरे में पड़ जाते थे पर अब स्वयं मंत्री हादसों को अपने लिए एक मौक़ा मानते हैं।वे इस इंतज़ार में रहते हैं कि कब हादसा हो और उन्हें जनता के साथ खड़े होने का सुयोग मिले।इस तरह वे सरकारी बजट को राहत-कार्य में बाँटकर अपना मंत्री बनना सार्थक कर सकें।कुछ ऐसे ही हृदयोद्गार व्यक्त किये हैं देश के हृदय-प्रदेश के बड़े मंत्री ने।एक बड़े हादसे के बाद जब उनसे पूछा गया कि इतनी मौतों का जिम्मेदार कौन है तो मंत्री जी ने बेलौस अंदाज़ में उत्तर दिया कि ये हादसे हैं और ये होते रहते हैं।अगर ये न हों तो जनता की सेवा करने का मौक़ा उनको कैसे मिलेगा !
हादसों को मौकों में बदलने वाले ऐसे लोग हमारे लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने में जुटे हैं।ऐसे लोगों का लोकतंत्र में प्रवेश किसी हादसे से कम नहीं।हमारे मुहल्ले का कल्लू पहलवान अखाड़ेबाजी में छोटे-बड़े दाँव आजमा लेता था।दैवयोग से एक दिन उसके दाँव से विरोधी की गरदन ने बाकी शरीर से जुड़े रहने की जिद त्याग दी।उसके घरवाले चिल्लाते रहे कि यह हत्या है पर पुलिस ने माना कि यह महज हादसा था।हादसे का संयोग मिलते ही कल्लू पहलवान सत्ताधारी दल में शामिल हो गए।उन्होंने इसे ईश्वर की ओर से दिया गया एक मौक़ा माना और आज वे प्रदेश के सुरक्षा मंत्री हैं।
लोकतंत्र की खूबी इसी में है कि नियमित अन्तराल पर ऐसे हादसे होते रहने चाहिए।इससे जनता के लिए बने बजट का कुछ हिस्सा उस तक पहुँचता ही है, राहत-राशि पहुँचाने से आपदा-राहत का पुनरभ्यास होता है सो अलग।मंत्री जनता के सामने खाली हाथ और बिना प्रयोजन के जाने लगें तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। मिले मौके का लाभ विरोधियों को लपकने भी नहीं देना चाहिए ! सरकार उनकी है,बड़े जोड़-जतन से बनी है तो लोगों को दिखनी भी चाहिए।हादसे के समय मंत्री जी का पीड़ित परिवार को ढांढस बँधाना और मातम से भरी भीड़ में अपनी मुस्कुराती पोज़ देना सबसे दुष्कर कार्य है।यूँ भी हादसा एक होता है और सरकार के मंत्री अनेक।गलती से हादसा कहीं और बड़ा हो गया तो मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के आगे मंत्री को मौक़ा गंवाना पड़ सकता है ! इसलिए जितने ज्यादा हादसे, उतनी अधिक कामकाजी सरकार।हादसों के बिना मौके का और बिना मौके के लोकतंत्र का भविष्य खतरे में दिखता है पर कुछ नासमझ इसे अवसरवाद से जोड़ देते हैं।यह गलत प्रवृत्ति है।
संतोष त्रिवेदी
जे 3/78 ए ,पहली मंजिल,
खिड़की एक्स.,मालवीयनगर
नई दिल्ली-110017
खिड़की एक्स.,मालवीयनगर
नई दिल्ली-110017
Friday, March 27, 2015
Friday, July 25, 2014
Monday, May 6, 2013
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